Ras in Hindi Vyakaran (रस)

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रस का शाब्दिक अर्थ है "आनंद" अर्थात कविता को पढ़ने से जो आनंद की प्राप्ति होती है उसे रस कहते हैं ।
The literal meaning of ras is "joy", it is said to be the joy that is achieved while reading a poem.
संस्कृत (Sanskrit) में कहा गया है "रसात्मकाम वाक्यं काव्यम" (rasatmakam vakyam kavyam) जिसका अर्थ है रसयुक्त वाक्य ही काव्य है।
सर्वप्रथम भरत मुनि (Bharat Muni) ने अपनी रचना (creation) नाट्यशास्त्र (Natyashastra) में रस का प्रयोग किया था।
उनके अनुसार विभाव (vibhaav), अनुभाव (anubhaav) तथा संचारी भाव (sanchari bhaav) से मिलकर एक विशेष स्थायी भाव की उत्पत्ति (originate) होती है उसे रस कहा जाता है।

रस के भेद
सामान्यतः रस 9 प्रकार के होते हैं । इनका वर्णन निम्न है:
(1) श्रृंगार रस (Shringar Ras)
इसका स्थाई भाव "रति" है। जब कविता में नायक और नायिका के मन में स्थित प्रेम या रति को दर्शाया जाता है तो वह श्रंगार रस कहलाता है। श्रृंगार रस में प्रकृति, सौन्दर्य, ऋतु, पक्षियों का चहचहाना आदि का वर्णन किया जाता है |
Basically, it explains love in the form of poetry.
(2) वीर रस (Veer Ras)
इसका स्थायी भाव "उत्साह" है। जब युद्ध या अन्य कठिन कार्य के लिए जो उत्साह उत्पन्न होता है उसे वीर रस कहते हैं।
This explains bravery of war.
(3) हास्य रस (Hasya Ras)
इसका स्थाई भाव "हास" है | जब कविता में वाणी, वेशभूषा को देखकर मन में उत्पन्न हास का वर्णन किया जाता है तो वह हास्य रस कहलाता है।
(Hasya ras explains humour)
(4) शांत रस (Shant Ras)
इसका स्थायी भाव "निर्वेद" है। इस रस में संसार से वैराग्य या परमात्मा के रूप का ज्ञान होने पर मन को जो शान्ति प्राप्त होती है उसका वर्णन किया जाता है।
(This explains indifference towards the real world.)
(5) करुण रस (Karun Ras)
इसका स्थायी भाव "शोक" है। इसमें किसी अपने का वियोग या विनाश एवं प्रेमी से सदा के लिए दूर हो जाने से जो वेदना उत्पन्न होती है वह करुण रस कहलाता है।
(This explains mourning)
(6) अद्भुत रस (Adbhut Ras)
इसका स्थायी भाव "आश्चर्य" है। इस रस में व्यक्ति के मन में उत्पन्न आश्चर्यजनक व विचित्र वस्तुओं से जो विस्मय उत्पन्न होता हैं उसे दर्शाया जाता है।
(This explains surprise)
(7) भयानक रस (Bhayanak Ras)
इसका स्थायी भाव "भय" है। इस रस में किसी अनिष्टकारी या भयानक वस्तु/व्यक्ति को देखने से मन में जो भाव उत्पन्न होता है उसका वर्णन किया जाता है।
(This explains terror)
(8) रौद्र रस (Raudra Ras)
इसका स्थायी भाव "क्रोध" है। इसमें एक व्यक्ति या पक्ष के द्वारा दुसरे व्यक्ति या पक्ष का अपमान करने से जो क्रोध उत्पन्न होता है उसका वर्णन होता किया जाता है।
(This explains anger)
(9) वीभत्स रस (Vibhatsa Ras)
इसका स्थायी भाव "घृणा" है। इस रस के अंतर्गत घृणित वस्तु या व्यक्ति को देखकर या उनका विचार करके मन में जो घृणा के भाव उत्पन्न होते हैं उनका वर्णन किया जाता है।


Examples

Few examples are discussed below.
(1) श्रृंगार रस (Shringar Ras)
बतरस लालच लाल की, मुरली धरि लुकाय।
सौंह करे, भौंहनि हँसै, दैन कहै, नटि जाय ||

(2) वीर रस (Veer Ras)
बुंदेले हर बोलो के मुख हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी

(3) करुण रस (Karun Ras)
सीता गई तुम भी चले मै भी न जिऊंगा यहाँ
सुग्रीव बोले साथ में सब जायेंगे वानर वहाँ

(4)  वीभत्स रस (Vibhatsa Ras)
आँखे निकाल उड़ जाते, क्षण भर उड़ कर आ जाते
शव जीभ खींचकर कौवे, चुभला-चभला कर खात