Vachya in Hindi Vyakaran

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वाच्य (Vachya) क्रिया के उस रुप को कहा जाता है जो वाक्य के कर्ता प्रधान या कर्मप्रधान होने का बोध कराता है ।
क्रिया के लिंग एवं वचन उशी अनुरुप बदलते हैं।

The form of a sentence like active voice or passive voice is identified as Vachya in Hindi grammar. The active voice sentence is known as Kartapradhan whereas the passive voice sentence is known as karmpradhan Vachya in Hindi. 

उदा:  रमेश दफ्तर जाता है।    : कर्ताप्रधान  :इस वाक्य में कर्ता प्रमुख है अौर क्रिया के लिंग अौर वचन कर्ता के अनुसार है ।

रमेश द्वारा दफ्तर जाया जाता है :कर्मप्रधान : इस वाक्य में कर्म प्रमुख है अौर क्रिया के लिंग अौर वचन कर्म के अनुसार है ।

उसे लज्जा आती है  : भावप्रधान :इस वाक्य में भाव के अनुरुप क्रिया का रुप हे।


Vachya ke Bhed

वाच्य के भेद: 

१) कर्तृवाच्य (Kartru Vachya)

२) कर्मवाच्य (Karm vachya )

३) भाववाच्य (Bhav vachya)

१) कर्तृवाच्य (Kartru Vachya): जैसे कि नाम से बोध होता है ,कर्तृवाच्य  कर्ता प्रधान वाक्य का रुप है।क्रिया का रुप कर्ता के लिंग ,वचन अौर पुरुष के अनुसार होते हैं। 

 जैसे: सुधा पौधौं को पानी डालती है।
         बच्चें  मैदान में खेल रहे हैं।

यहाँ पहले वाक्य में कर्ता ‘सुधा’ स्त्री लिंगी एकवचन है  ।क्रिया ‘डालना’ का रुप कर्ता के  अनुरुप है।

दूसरे वाक्य में कर्ता ‘ बच्चे’ बहुवचन है अौर क्रिया रहना का रुप उसी के अनुसार है।

कर्तृवाच्य में अकर्मक अौर सकर्मक दोनों प्रकार कि क्रियाअों का उपयोग होता है।

      १) रोहित कार चलाता है । (सकर्मक)

      २) रोहित जोर से हसाँ। (अकर्मक)

२)कर्मवाच्य (Karmvachya) : इन वाक्यों में क्रिया का रुप कर्म के अनुसार बदलता है।

१) मजदूरों द्वारा सड़क बनायी जा रही है।

२) मजदूरों द्वारा पत्थर उठायें जा रहे हैं।

उपर दियें गयें दोनो वाक्यों में कर्म के लिंग अौर वचन अनुसार क्रिया के रुप है। दोनों वाक्यों में कर्ता समान है -मजदूर का बहुवचन ।वाक्य १ में कर्म है : सड़क -स्त्रीलिंग एकवचन अौर वाक्य २ में है पत्थर : बहुवचन।कर्म के रुप के अनुसार दोनों वाक्यों में क्रिया के अलग अलग रुप हैं।

कर्मवाच्य के कुछ अौर प्रकार: 

क्रिया के अज्ञात होने पर :  हम सब को बुलाया गया था।  आदेश दिया गया।
कानूनी भाषा का प्रयोग करते हुए : गवाह को कटघरे में लाया जाए।  
सोसायटी के सर्व निवासियों को सूचित किया जाता है कि कल वर्धापन दिन मनाया जायेगा।
अचानक किसी घटना  के घटित होने पर:  यह क्या हो गया! 

भाववाच्य :जहाँ वाक्यों में भावों की प्रधानता होती है ,जैसे: धूप में दौड़ा नहीं जाता । अब चला जाए।


भाववाच्य प्रयोग में क्रिया हमेशा अकर्मक  होती है। कर्मवाच्य में क्रिया सकर्मक होती है ।

वाच्य परिवर्तन: 

कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य 

कर्तृवाच्य   कर्मवाच्य
 अमन पत्र लिखता है।  अमन द्वारा पत्र लिखा जाता है ।
 गीता ने फूल तोड़ा।  गीता द्वारा फूल तोड़ा गया।
 दीपा ने समोसे बनाए।  दीपा द्वारा समोसे बनाए गयें।


कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में परिवर्तन करनेके लिये कर्ता के अागे द्वारा ,के, से जोडना चाहिए।
कर्म के साथ लगी विभक्ति हटा देनी चाहिए।
क्रियापद में ‘या’ प्रत्यय जोड़ा जाता है अौर ‘जा’ धातू का प्रयोग कर्म के लिंग,वचन के अनुसार होना चाहिए।

कर्तृवाच्य से भाववाच्य 


कर्तृवाच्य भाववाच्य
 मै दौड़ सकता हूँ। मुझसे दौड़ा जाएगा।
 राधा दिन में नहीं सोती। राधा से दिन में सोया नहीं जाता।
 अंकीता शर्मा गयी।अंकीता को शर्म आयी।



कर्ता के बाद ‘से’,’के’, ‘द्वारा’ विभक्ति का प्रयोग होता है।
‘जा’ धातु के रुप को क्रिया के काल अनुसार जोड़ा जाता है।