CBSE Hindi Kahawat

Top


Hindi Kahawat (हिंदी कहावत) (Proverbs)
कहावत या मुहावरे भाषा को रोचक ,प्रभावशाली एवं सुंदर बनाती है। कहावत का अर्थ है  “समाज में प्रचलित कथन” , जिसका प्रयोग हम आम तौर पर रोजमर्रा की ज़िंदगी में करते हैं। कहावत पूर्ण वाक्य नहीं बल्कि सांकेतिक  वाक्यांश होते है जिनका विशेष अर्थ होता है।

नीचे कुछ दिलचस्प हिंदी कहावते अौर उनके अर्थ दिए गए हैं।

१) अपने मुहँ मियाँ मिठ्ठू बनाना -   अपनी बढ़ाई अपने आप ही करना।
२)अंधों में काना राजा - मूर्खों में अल्पज्ञ  ज्ञानी।
३)अपना रख पराया चख- अपनी चीज़ संभाल कर रखना अौर दूसरों की चीजों को इस्तेमाल करना।
४)अपनी अपनी खाल में सब मस्त-  हर इंसान अपनी परिस्थिती में खुश रहे।
५)अधजल गगरी छलकत जाए - थोड़ी विद्या या थोड़ा धन पानेवाला घमंडी होता है।
६)आम काआम गुठली का दाम - पूर्ण रुप से लाभ उठाना।
७)अंकुश लगाना- नियंत्रण रखना।
८)अंगारा उगलना– जली–कटी सुनाना।
९)आप भला तो जग भला- खुद दूसरों से अच्छा व्यवहार करं तो बाकी बी आपके साथ अच्छे से ही रहेंगे।
१०)आगे कुआँ पीछे खाई -चारों तरफ मुसीबत।

११)आधा तीतर आधा बटेर- पूरी तरफ से किसी एकतरफ ना होना।
१२)आसमान से गिरा खजूर पर अटका - एक मुसीबत से निकलकर दूसरे मुसीबत में फसना।
१३)आग लगने पर कुआँ खोदना- आवश्यकता पडने पर काम शुरु करना ,पहले से कुछ नही करना।
१२)ईट का जवाब पत्थर से - ठोस उत्तर ,कडा जवाब।
१३)उलटा चोर कोतवाल को डाँटे -खुद कसूरवार होते हुए भी कसूर पकडनेवाले को दोषी ठहराना।
१४)ऊँट के मुँह में जीरा- जरुरत से बहुत कम।
१५) आकाश चूमना-बहुत बडा होना।
१६)आसमान सिर पर उठाना-बहुत हल्ला  मचाना।
१७)आव न देखा ताव - बिना सोचे समझे काम करना
१८)अँगूठा दिखाना-तिरस्कारपूर्वक मना करना।
१९)अंधे को चिराग दिखाना-मूर्ख को उपदेश करना।
२०)अक्ल का अंधा होना-बेअक्ल होना।

२१)इतनी सी जान गजभर की जुबान- अपनी उम्र के हिसाब से बहुत बडी बडी बातें करना।
२२)ईद का चाँद-बहुत दिनों बाद दिखाई देने वाले (व्यस्त) व्यक्ति ।
२३)उलटी गंगा पहाड़ चली- असंभव या विपरीत घटना होना ।
२४)आँख का तारा- बहुत प्यारा /अति प्रिय होना।
२५)उन्नीस -बीस होना- थोड़ा सा ही अंतर होना।
२६)ऊँगली उठाना- निंदा करना।
२७)ऊड़ती चिडिया के पर गिनना-किसी की गुप्त बात जान लेना।
२८)एक अौर एक ग्यरह होना- एकता में शक्ति।
२९)एक अनार सौ बिमार - चीज़ का कम होना अौर चाहने वाले ज्यादा होना।
३०)एक तवे की रोटी, क्या छोटी क्या मोटी - कोई भेदभाव ना होना अर्थात सब समान होना।

३१)काला अक्षर भैंस बराबर- अनपढ़ होना।
३२)खोदा पहाड़ निकली चुहिया- परिश्रम के हिसाब से बहुत कम फल मिलना।
३३)घर की मूर्गी दाल बराबर-सहज उपलब्ध होनेवाली की चीज़ को आदर ना मिलना।
३४)जैसी करनी वैसी भरनी-जैसा काम वैसा फल।
३५)सौ चूहे खाके बिल्ली चली हज को- अत्यधिक पाप करने के बाद भक्त होने का दावा करना।
३६)रस्सी जल गयी पर ऐंठन न गयी -पतन होने के बाद भी घमंड करना।
३७)साँप भी मरा अौर लाठी भी न टूटी- बिना किसी नुकसान के काम बन जाना।
३८) हाथ कंगन को अरसी क्या- प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता ना होना
३९)कहाँ राजा भोज कहागंगवा तेली-छोटे -बड़ो में तुलना ना होना।
४०)जहाँ न जाय रवि वहाँ जाय कवि -कवि की कल्पनाशक्ति बहुत तेज होती है।